article
परसद क नटक म परष वरचसव एव सतर-असमत
International journal of applied research · 2018 · Vol. 4(10) · pp. 464–465
Abstract
सामाज म सतरी की छवि को अचछी तरह उभार नही पात तब तक सतरी-असमिता या सतरी मकति की कामना वयरथ ह। सतरी की छवि को इस परष वरचसवशील समाज न अबला, गलाम, कामिनी, माया इतयादि नामो स पकारा ह। इन विभषणो पर कानन, समाज, धरम और सतता न भी महर लगाई ह। इतना ही नही, सतरियो का वरणन करत समय भारत दश क तमाम महरषि, सनत, विदवान और दारशनिक भी उस ऐस निशचित विचारो की सीमा म ही सथान दत पाए जात ह।
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