सवततरत परव एव सवततरत क पशचत महल नततव वकस म पचयत रज क भमक
Abstract
महिला नततव विकास एक ऐसी मौन कराति का दयोतक ह जो अभी राषटरीय सतर पर सारवजनिक रप स भल ही दिखाई नही द रही हो पर उसकी धीमी आच भारतीय लोकततर को अवषय मजबत बना रही ह। यह कराति दश क सतता-विमरश क ढाच म ही बदलाव नही ला रही ह बलकि पचायत सतर पर इतनी बड़ी सखया म महिलाओ की भागीदारी न सथानीय सतर पर सामदायिक जीवन और उसकी चतना तथा ससकति म भी परिवरतन लाया ह। इन निरवाचित महिला परतिनिधियो न सतता क जातीय समीकरण को ही नही, बलकि सामाजिक और आरथिक समीकरण को भी बदला ह। गराम सभा स लकर ससद तक राषटरीय सतर पर महिलाओ की भागीदारी दिनादिन बढ़ती जा रही ह। अब सथिति यह ह कि पचायतो म भागीदारी होन क साथ ही उनकी आतमनिरभरता भी बढ़ी ह। उनम जागरकता भी आयी ह और व छोट-छोट सवय सहायता समहो क जरिय अपना सवरोजगार अपना रही ह और दश क राषटरीय विकास म अपना सहयोग भी द रही ह। इस तरह यह कहना गलत नही होगा कि पचायतो स ही महिलाओ क राजनीतिक एव सशकतीकरण अभियान को गति मिली ह। जब पचायतो म उनकी भागीदारी बढ़ी तभी व हर दिशा म आग निकल पायी ह।
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