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नतकत एव करपरट वरलड : एक ववचन
International journal of applied research · 2020 · Vol. 6(10) · pp. 693–695
Abstract
परसतत शोधपतर म 'नतिकता एव कारपोरट वरलड' का विवचन किया गया ह। वशवीकरण क इस दौर म जबकि सचना और सचार कराति न सबकछ बदल कर रख दिया ह। परा समाज बाजार म तबदील हो चका ह। उपभोकतावाद हावी ह, ऐस म नतिकता की चिता महतवपरण ह। नतिकता एव कारपोरट जगत का अनयोनयाशरय समबध ह। नतिकता, कारपोरट जगत क सामन एक परतिमान परसतत करती ह तथा एक षवॉय डॉगष की भाति उसकी परतयक गतिविधियो का सकषमता स अवलोकन करती ह। नतिकता उनह षववरडसष होन स रोकती ह तथा अपन आदरशो एव कारयकरमो स भटकन वाल उदयोग समहो को वापस पटरी पर लान म महतवपरण योगदान करती ह।
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