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मधयकलन मथल क सगत गरथ क अधययन

International journal of applied research · 2018 · Vol. 4(1) · pp. 43–46

Abstract

मधयकाल म मिथिला म बहत स मथिल कवि हए थ जिनकी किरति भारतीय परायदवीप म परसिदध हए थ। इसी काल म बहत स कवि जस विदयापति, भोज सोमषवर, महरषि याजञवलक, प. चतनय दसाई आदि कवि हए। इस काल को सवरण काल कहा जाता ह। भोज सोमषवर दवारा रचित भरत भाषय को दो खणडो म बाटा गया जिनक परथम खणड म पाच अधयाय एव दवितीय खणड म दो अधयाय ह। परथय लखक न वरणरतनाकर गरथ क अधयाय को कललोल म बाटा ह। जिनक परथम कललोल म राजा रानी एव नगर वयवसथा का वरणन किया ह। इसक दसर कललोल म नायक (राजा) एव उनक परकार तथा लकषणो का उललख किया ह। तिसर कललोल म राजा क आम दरबार एव उनक पदाधिकारी का वरणन किया ह। चतरथ कललोल म विभिनन ऋत एव उनम होन वाली पराकतिक परिणाम का वरणन किया गया ह। पचम कललोल म यदध हत घोड़ा तयार करना परषिकषण आदि, परषिकषण विधि का वरणन किया ह। षषठ कललोल म विविध विदया एव कलाओ का जञान रखन वाली जाती भाट का वरणन ह। सपतम कललोल म ततर साधना एव अषटम म राजाओ क कल का वरणन ह।

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