Scinovex
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रहसयवद और कबर

International journal of applied research · 2016 · Vol. 2(1) · pp. 126–127

Abstract

कबीर क रहसयवाद को समझन क लिए सरवपरथम रहसयवाद, अनधद, धयान-योग, उलटबासी क मल म निहित जो मल आषय ह उस समझन की जररत ह। कबीर म जो रहसय भावना ह, उसका कारण तन को दवालय बनाकर उसी म अपन ईषवर क साकषातकार का परयतन ह। इस रहसय भावना क अनक परतीकारथ ह। कबीर का रहसयवाद बहत हद तक आज भी रहसय ही ह। मनषय का असली धरम इस मायालोक स मकत होन म ह, इस ससार रपी नहर को छोड़कर बाबल क घर जान म ह। कबीर की यह घोषणा उनह रहसयमयी साधना का अनगामी बनती परतीत होती ह।

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