बदध शहर तकषसल
Abstract
तकषशिला की ऐतिहासिकता सब कषतर म विशब परसिदव रही ह जञान - विजञान म तो थी ही साथ साथ बौदध धरम क बार म जयादा परसिदध रही ह तकषशिला क इस पर कषतर को तीन भागो म बाटा गया ह - सिर कप, सिर सख, भीर माऊड इन सब को चीनी बौदध तीरथ यातरी हनसाग न दखा उसक बाद परसिदध पराततवतता जान मारशल, ए. कनिघम न उतखनन कर चीनी यातरी की बातो को परमाणो स सतयापित किया, परसिदध मौरय समराट अशोक न अपन सिला लख तकषशिला म सथापित कराय जिनक माधयम स जन समह को सीध अशोक क जन कलयाणकारी कारयो की जानकारी मिलती रह तकषशिला क बौदध मठ, बौदध सतप, इस सहर को बौदध सथल होन क परमाण दत ह यही पर परसिदध धरमराजिका बौदध सतप ह जिसम भगबान बदध का बाल सरकषित ह इस कणाल न निरमित कराया इस बिसाल बौदध सतप को चीनी बौदध तीरथ यातरी दख कर चकित रह गया चीनी यातरी फाहयान न इस सथल पर परसिदध विशबबिदयालय होन की बात कही ह जिसम परबश कठिन परीकषा क माधयम स होता था जिसम कई सो विदशी छातर अधयन करन आत, जिनका खरचा दान स मिल धन स परा किया जाता था जहा बौदध धरम क साथ साथ विजञान की शिकषा परदान की जाती थी
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