करतकर रषटरवद और बहर
Abstract
बिहार म 19वी शताबदी क आरभिक दशक म करातिकारी राषटरवाद का उदभव तथा विकास हआ। यदयपि बिहार क राषटरीय आदोलन का इतिहास उस राषटरीय मकति आदोलन की परतिगामी चतना और जन-आधार का इतिहास ह। जिसकी शरआत बिहार क उदीयमान बरजआ और वयवसायी वरग क थोड़ स लोगो न अपन उन थोड़ स सीमित उददशयो को, जिनको परापत करन म उनक सवारथ बरिटिश औपनिवशिक शासको क सवारथो स टकरात थ, परापत करन हत धयान म रखकर शर किया था और इतिहास की परकरिया क साथ वह अपन परण सवरप को परापत कर लिया। उदीयमान भारतीय बरजआ वरग की जररत थी, उसकी मागो क समरथन म राषटरीय गोलबदी और बरिटिश उपनिवशवादियो की जररत थी- इस राषटरीय गोलबदी क लिए मौजद आधारो को तहस-नहस करक रखना, जो परसपर विरोधी राजनीतिक लकषयो का टकराव बिहार म राषटरीय आदोलन क शरआती दौर म दखा जा सकता ह।
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