बदध धरम और परचन महलए
Abstract
पराचीन भारतीय महिलाओ की सथिति की ऐतिहासिकता समय,शासक, सथान क अनसार बदलती रही ह यो तो भारतीय महिलाय सब कषतर म विशब परसिदव रही ह जञान - विजञान म तो थी ही साथ साथ बौदध धरम क बार म जयादा परसिदध रही ह, वदिक काल म ब परसो क साथ बराबर की सथिति म होती थी पर यह सतर उततर वदिक काल म उनका नही रहा, उनको परसो क समकष भगीदारी नही मिलन लगी, महिलाओ की गिरी हई सथिति का अदाजा इसस लगाया जा सकता ह की उनकी तलना विसल सरप स की जान लगी अरथात उनस दरिया बनाक रखन की सलाह तक दी जान लगी, बौदध धरम न महिलाओ को इस सथिति स बाहर निकाल कर पनः उचित सथान दिलाया आनद क कहन पर भगबान बदध न महिलाओ क लिए मोकष परापति क दरवाज खोल दिए बौदध धरम म महिलाय निरवाण परापत कर सकती थी, बौदध मठो म निवास कर सकती, बौदध भिकषणिया बन सकती थी, बौदध काल म महिलाओ को बौदध धरम क साथ साथ विजञान की शिकषा भी परदान की जाती थी,उनक गीतो को थरीगाथा म सकलन किया गया ताकि नई आन बाली बौदध भिकषणियो क लिए य जञान मिलसक, कई महिलाओ को निरवाण मिलन की बात भी विनय पिटक जस पाली बौदध गरथो म बताई गयी ह
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