हनद पतरकरत और रषटरवद
Abstract
भारत क इतिहास म उननीसवी सदी सामाजिक आरथिक सकरमण का काल ह, जिनम स आधनिक भारत का अभयदय हआ। 19वी सदी म भारतीयो म राषटरवाद की भावना क विकास का परारभ हआ। राषटरवाद क उदय म हिनदी पतरकारिता का महतवपरण योगदान रहा। पतरकारिता जनसचार का सशकत माधयम ह, जो समाज को जागत करक उसम उतसाह एव चतना का निरमाण करत ह। इसस मनषय जीवन की विविधताए तथा रोज घटनवाली घटनाओ स परिचित होत ह। पतरकारिता की शकति स समाज की कमियो, गलतियो और करीतियो को दर करन का परयास किया जाता ह। पतरकारिता लोगो को आरथिक, सामाजिक, सासकतिक, साहितयिक, राजनतिक गतिविधियो का परिचय दकर उसम जागति लात ह। भारतीय राषटरीय आदोलन क दौरान लोगो को जागरक करन म पतरकारिता का योगदान महतवपरण रहा। परस तथा पतरकारिता क दवारा राषटरवाद को नया आयाम मिला।
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