भरत म महलओ क अधकर: एक रजनतक वशलषण
Abstract
अतीत म, महिलाओ न मखय रप स परष परधान समाज मकछ मानदडो और परपराओ का पालन किया जो उन पर कई परतिबध लगात थ। कारयकरताओ, मानवाधिकार ततरो और राजयो का कारय यह सनिशचित करन म महतवपरण रहा ह कि मानवाधिकार ढाच का विकास और समायोजन किया गया ह ताकि महिलाओ को बहतर तरीक स सरकषित करन क लिए मानवाधिकारो क उललघन क लगिक विशिषट आयामो को सकषप म परसतत किया जा सक। महिलाओ क मानव अधिकारो को कशलतापरवक सनिशचित करन क लिए मौलिक सामाजिक सरचना और शकति सबधो की वयापक समझ की आवशयकता ह जो मानव अधिकारो का आनद लन क लिए महिलाओ की कषमता को परिभाषित और उततजित करत ह। इन शकति सरचनाओ का जीवन क सभी पहलओ पर परभाव पड़ता ह। कानन और राजनीति स लकर आरथिक और सामाजिक नीति, पारिवारिक और सामदायिक जीवन, शिकषा, परशिकषण, कौशल विकास और रोजगार क अवसरो की परापति तक इसका परभाव पड़ता ह। इस पतर क माधयम स भारत म महिलाओ क अधिकार पर एक राजनीतिक विशलषण परसतत करन का परयास किया गया ह।
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