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शयरज सह बचन क कवतओ म जत एव वरग-चतन

International journal of applied research · 2019 · Vol. 5(1) · pp. 352–354

Abstract

साहितय और इतिहास एक-दसर क विरोधाभासी नही ह, बलकि परक ह, साहितय क दो पकष होत ह, पहला ऐतिहासिक और दसरा राजनीतिक पकष। ‘‘शयौराज सिह ‘बचन’ की कविताओ म जाति एव वरग-चतना’’ म दलित समाज क विकास क लिए लिखा गया ह, जिसम दलित समदाय म शिकषा की कमी ह, जिस दिन समाज क बचच अपना समाज का इतिहास समझ जाऐग, उस दिन स अपना मौलिक अधिकार और किसी ठाकरो की गलामी नही करग, शयौराज सिह की कई कविता म समाज को जगान का काम किया गया ह, अमबडकर क तीन मतर परमख ह, शिकषित बनो, सगठित हो, सघरष करो। दलित समाज का मखय रप स शिकषा ही एकमातर साधन ह।

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