Scinovex
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वद म परवरक मलय क महततव

International Journal of Jyotish Research · 2019 · Vol. 4(1) · pp. 27–30

Abstract

ससार क समसत पराणियो म मनषय ही सरवशरषठ पराणी ह, इसी सरवोततम रचना क साथ इस जो शकतिया परापत ह वह अनय पराणी को परापत नही ह, मनन, चितन, विवक, विशवहित चितन, सरवोननति क साथ समगर परिवार की कामना हमार पारिवारिक मलयो को सदढ़ करती ह यही वद का वदतव ह। परिवार म सखी जीवन क साथ परिवार क सभी सदसयो म परमभाव की उतपतति का भी वदो म अति महततवपरण वरणन ह। परिवार एक परकार स राषटर और समाज का सकषिपत रप ह इसम पति-पतनी, पतर-पतरी, माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, भाई-बहिन, आदि सभी समनवित ह। एक सनदर और सवयवसथित परिवार सवरग ह और एक विकत और अवयवसथित परिवार नरक ह इसलिए वदो म परापत पारिवारिक मलयो की शिकषाओ की सकषिपत रपरखा परसतत की जा रही ह।

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वद म परवरक मलय क महततव · Scinovex