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महकव शमभदयलपणडय वरचत रजतपदश महकवय म धरमपरयणत दनशलत एव तपपरयणत: एक अधययन

International Journal of Jyotish Research · 2018 · Vol. 3(1) · pp. 06–08

Abstract

धरम, दान और तप य मानवजीवन को मलयवान बनान वाल अनमोल रतन ह। इनस ही किसी भी मानव का जीवन सवरता ह, उतकषट होता ह। यही कारण ह कि आदिकालीन कवियो न उकत तीनो ही गणो की परसशा अपन कावयो, महाकावयो म मकतकणठ स किया ह। महाकवि शमभदयाल जी न आधनिक परिपरकषय म अकत तीनो मानवीय गणो (मलयो) को जाना और पहचाना ह तथा उस अपन महाकावय म उचित आदर क साथ उपसथापित किया ह। यह महाकावय आधनिक तजसवी सनयासी ’रजत मनि’ क चरितर को आधार बनाकर रचित ह। परसतत शोधालख म उकत तीनो गणो को जो मानवीय मलयो की कसौटी क रप म जान व परख जात ह का महाकवि शरीमान पाणडय जी दवारा विरचित महाकावय म समावश किया गया ह।

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