भरत क परमपरओ समपतक अधकर एव सतर धन म उलझ नर
Abstract
मधयकाल म हमारा दश धन-धानय स परिपरण था। मसलिम आकरमणकारियो न इस दश पर अपार धन स ही आकरषित होकर अनक बार आकरमण किय। यहा की आरथिक समदधि ही महमद गजनवी को बार-बार आकरमण करन क लिय पररणा दती रही। मोहममद बिन कासिम और महमद गजनवी दोनो न ही भारत क अपार सोन तथा बहमलय रतनो क भडारो को लटा जिसका वरणन ततकालीन लखो म किया गया ह। इनक अनसार महमद गजनवी सवदश लौटत समय हिदसतान की अपार सपदा को ऊटो, घोड़ो एव खचचरो म लाद कर ल गया था परत इतन विशाल पमान पर की गई लटपाट क पशचात भी दश की आरथिक दशा सोचनीय नही हो सकी, कयोकि उतपादन क परमख साधनो को नषट करना विदशी आकरमणकारियो क लिए सभव नही था। परारभिक आकरमणकारियो की लट न हमार दश की आरथिक दशा पर विशष परभाव नही डाला। मधयकालीन आरथिक जीवन की जानकारी अबल फजल की रचना आईन-ए-अकबरी। 1 समकालीन साहितयिक रचनाय तथा विदशी परयटको क वरणन स मिलती ह। अधययन स हम इस निषकरष म आत ह कि मधयकाल म नारियो की आरथिक सथिति उननति थी। मधयकाल म धात उदयोग का भी परयापत विकास हआ था। धातओ स विभिनन परकार क औजार बनाय जान थ। 2 उचच वरग क लोगो की सपननता अनक उचच जीवन सतर, खान-पान, पोशाक आभषण एव रहन-सहन स सपषट झलकती ह। आरथिक दषटि स उचच वरग की नारियो की दशा अचछी थी। मधयम वरग की नारियो की आरथिक दशा साधारण थी। निमन वरग की नारियो की आरथिक सथिति अचछी न थी, उनह जीवन यापन क लिए अनक कठिनाइयो का सामना करना पड़ता था। उचच वरग क लोग उनका शोषण करत थ।
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