Scinovex
article

समचर पतर क भष पर टलवजन क भष क परभव

International journal of applied research · 2019 · Vol. 5(2) · pp. 178–182

Abstract

जनसचार माधयमो म सचार भाषा की उपयोगिता और भमिका सरवाधिक महतवपरण मानी जाती ह । चाह वह मदरित मीडिया हो या इलकटरॉनिक मीडिया, परसारणकरता को इस बात की सतरकता बरतनी पड़ती ह और भरसक चषटा करनी पड़ती ह की उसका कथय सही अदाज़ म हर एक वयकति तक समपरषित हो सक । यह समपरषण मलतः भाषिक परयोग पर निरभर होता ह । जब अपन लकषयभत पाठक या दरशक का सही अनमान परापत हो अरथात उनकी अभिरचि, उनकी समझदारी और उनकी मनोदशा का सही-सही सजञान हो जाता ह तभी हर सनदश का विधिवत सही सपरषण हो पाता ह। आज हिदी क समाचार पतरो म जिस भाषा का परयोग हो रहा ह वह भाषा की पकड, शबदो क चयन व उनकी परसतति पर परशन चिनह लगात दिखाई दत ह। समाचार सामगरी को तरत परोसन क उतावलपन म अखबार की सरखिया सीधी टलीविजन चनल स उठा ली जाती ह इसक दनिक समाचार पतर की भाषा म विशषत: वाकय रचना म तरटि दखन को मिलती ह। चकि समाचार सीध टीवी स लिया जाता ह, आम बोलचाल की भाषा को पतरकारिता की भाषा क रप म इसतमाल किया जाता ह । हिनदी पतरकारो की नई पीढ़ी को पतरकारिता की भाषागत नाव को सही दिशा म खन क विवक क परशन पर गभीरता स विचार करना होगा। इस उददशय को धयान म रखत हए समाचार पतरो की भाषा पर टलीविजन भाषा परभाव क बार म लखनऊ विशवविदयालयो क छातरो की राय जानन का परयास किया गया था जो अधययन क रप म यहा परसतत ह। अधययन का उददशय: समाचार पतरो की भाषा पर टलीविजन भाषा परभाव क बार म लखनऊ विशवविदयालयो क छातरो राय जानना । अनसधान परणाली: वरतमान अधययन क लिए, अपनाई गई शोध विधि परकति म वरणनातमक ह । शोधकरता दवारा निरधारित चयन मानदडो क आधार पर, लखनऊ शहर क पाच विशवविदयालयो म स स 500 छातर चन गए थ I अधययन क परापताक क अनसार अधिकतम उततरदाता यह मानत ह कि टलीविजन समाचार की वजह स समाचार पतरो म भाषा की परकति म विकति आई ह और वयाकरण नियमो की उपकषा की जा रही ह। समाचार पतरो की आकरामकता की जगह बाजारपरसती न ल ली ह” और समाचार पतरो म पहल जसी गभीरता और गरिमा खो गयी ह।

Citations
0
FWCI
0.00
field-weighted impact
References
0
Percentile
11%
vs. same field & year
Citation Network

How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.

समचर पतर क भष पर टलवजन क भष क परभव · Scinovex