जयतरवजञन क दषट स नतर रग क उतपतत व वशलषण
Abstract
नतर शरीर का वह अग ह जो विभिनन उददशयो क लिए परकाश स परतिकरिया करता ह | यह मानव क शरीर की एक इनदरिय ह | आख अतयत जटिल जञाननदरिया ह | आख या नतरो क दवारा हम वसत का दषटिजञान होता ह। दषटि एक जटिल परकरिया ह, जिसम परकाश किरणो क परति सवदिता, सवरप, दरी, रग आदि सभी का परतयकष जञान समाहित ह। मानव शरीर म दो आख होती ह | जो दायी-बायी दोनो ओर एक-एक नतर कोटरीय गहा म सथित रहती ह। य लगभग गोलाकार होती ह तथा इनह नतरगोलक कहा जाता ह। आखो म फोटो रिसपटर होत ह | जो कि परकाश को विदयत सिगनल म परिवरतित करता ह | फिर यह सिगनल ऑपटिक सनाय मसतिषक म पहचता ह और वयकति को दषटि की अनभति होती ह | दषटि वह सवदन ह, जिस पर मनषय सरवाधिक निरभर करता ह। इसक सबस गहर भाग म एक गोल छिदर (फोरामन) होता ह, जिसम स होकर दवितीय कपालीय तनतरिका (ऑपटिक तनतरिका) का मारग बनता ह। नतर क ऊपर व नीच दो पलक होती ह। य नतर की धल क कणो स सरकषा करती ह। नतर म गरनथिया होती ह। जिनक दवारा पलक और आख सदव नम बनी रहती ह। मनषय म अनक परकार क नतर रोग होत ह जस कि जनम स अधा होना, मोतियाबिद होना, रात म दिखाई न दना, कभी किसी बिमारी स रोशनी चली या कम हो जाती ह। जयोतिरविजञान म जनमजात रोग क अलावा वात, पितत व कफ स उतपनन होन वाल रोग शारीरिक एव मानसिक रोगो क योग बतलाय गय ह |
How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.
