Scinovex
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जयतष म रग क करण व नवरण

International Journal of Jyotish Research · 2017 · Vol. 2(1) · pp. 32–38

Abstract

पहला सख निरोगी काया अरथात सवासथय जीवन का सबस बड़ा सख ह | यदि वयकति सवासथय नही ह तो अनय सख किस काम का | परषारथ म भी धरम, अरथ, काम और मोकष का मल आधार सवासथय ह । इन चतरविध परषारथो को सिदध करन क लिए सवसथ होना परम आवशयक ह1। इसलिए हर कारय को छोडकर सवासथय की रकषा कर । सवसथ शरीर ही सभी करमो का मलाधार ह2| सवसथ शरीर को पहला धरम माना ह | अरथात धरम, शरषठ करम, परमारथ आदि करन क लिए शरीर परारभिक साधन ह। यदि शरीर सवसथ नही ह, तो मन म अचछ भाव, अचछ विचार होत हए भी मनषय अचछ कारयो को अजाम नही द सकता। आचारय कौटिलय क अनसार “सभी वसतओ का परितयाग करक सरवपरथम शरीर की रकषा करनी चाहिए कयोकि शरीर नषट होन पर सबका नाश हो जाता ह” | शरीर का शतर रोग रोग ह रोगी की सथिति मतक क समान ही होती ह | महाभारत क उदयोगपरव म कहा गया ह कि “मत कलपा हि रोगिण:” | जयोतिष और आयरवद दोनो ही शासतर की मानयता ह की रोग परव जनम म किय गय पाप इस जनम म वयाधि क रप म कषट दत ह3| शरीर की धातओ म वातादि दोषो म विषमता विकार अरथात रोग उतपनन करत ह | उनका ठीक होना आरोगयता ह आरोगयता को सख कहा गया ह जबकि रोग दःख ह4| वातादि दोषो को सतलित रखना ही आरोगय का परमख कारण ह | कयोकि सभी रोगो का कारण परकपित दोष ही ह5| गरह-नकषतरादि म उपसथित कफादि तरिदोष मानव जीवन को परभावित करती ह | रोगो की उतपतति, कारण, भद एव लकषण आदि क समबनध म आयरवद और जयोतिष म बहत समानता ह रोगोतपतति क कारण क विषय म जनम फलो का आधार परव जनमकत करमो को बताया ह जो भारतीय जयोतिष और भारतीय चिकितसा अरथात आयरवद दोनो न ही न 'जनमातर कत करम वयाधि रपण जायत”6 कह कर उसकी पषटि की ह | परारबध, सचित एव करियमाण करम क तीन भदो म सचित करम ही रोगोतपतति क मखय रप स सवीकत ह | आचारय सशरत न करम व दोषो दोनो क परकोपो दवारा रोगोतपतति को सवीकार किया ह 7|

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