जननदर वयकरण म समस परकरण : एक अधययन
Abstract
जननदर वयाकरण पाणिनीय उततरकालीन शबदानशासन ह जो आचारय दवननदि दवारा छठी शताबदी क परवारदध म लिखा गया ह। यह परसिदध जनाचारय ह इनह पजयपाद नाम स भी अभिहित किया जाता ह। यह जन वयाकरण परमपरा का सबस पराचीन वयाकरण ह। परसतत शोधपतर म जननदर वयाकरण क समास-परकरण समीकषा की गई ह। जननदर वयाकरण म पाणिनीय समास-परकरण स कछ समानता तथा कछ असानताए दिखाई दती ह। कही सतर गत भद, कही उदाहरणो म भद तथा किनही सथलो म परकरिया समबनधी भद भी दिखाई दत ह, जिनका विववचन परसतत ह- पाणिनीय वयाकरण म सामास भद जननदर वयाकरण म समास भद समास क लिय - सः ।।१।३।२ सतर का परयोग । अवययीभाव -अवययीभावः ।।२।१।५ अवययीभाव क लिय - हः ।। १।३।४ सतर का परयोग । ततपरष - ततपरषः ।।२।१।२२ ततपरष क लिय - षम ।।१।३।१९ सतर का परयोग । करमधारय- ततपरषः समानाधिकरणः करमधारयः ।।१।२। ४२ करमधारय क लिय - यः - १.३.४७ सतर का परयोग । दविग -सखयापरवो दविगः।। २।१।५२ दविग क लिय - रः - सखयादी रशच १.३.४७ सतर का परयोग । बहवरीहि -अनकमनयपदारथ।।२।२।२४ बहवरीहि क लिय - बम - अनयपदारथऽनकम बम-१.३.८६ सतर का परयोग ।
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