शकष महवदयलय क छतरधयपक क अभवतत क तलनतमक अधययन
Abstract
शिकषा जगत म मनोवजञानिक अभिवतति परतयक शिकषक म समाहित होना चाहिय तभी वह एक अचछा परामरशदाता तथा सवसथ समाज का निरमाण कर सकता ह, कयोकि वह भावी पीढ़ी का पोषक ह। शिकषक को परतयक पहलओ पर विशष धयान रखना होगा, तभी वह आज क आधनिक पीढ़ी का सरवागीण विकास कर पायगा। शकषिक महतव क सभी उददशयो का निरधारण करना शिकषक का परम उददशय होना चाहिए। परसतत लघ शोध क लिए बिलासपर नगर म सथित तीन शिकषा महाविदयालय स 60 छातराधयापको का जिसम 30 महिला तथा 30 परष बी.एड. परशिकषारथीयो का चयन किया गया, जिस उददशयपरण परतिदरशन (Purposive Sampling) विधि स चना गया। इस अधययन क लिए Dr. T.S. Sodhi, (1974) दवारा निरमित Sodhi Attitude Scale का उपयोग किया गया। इनस परापत आकड़ो का विशलषण करन क लिए टी-मलय परीकषण का परयोग किया गया। अधयापक एव अभिभावक, अनशासन, जीवन एव मानवता, दश और धरम इन पाच विमाओ पर छातराधयापको की सभी कषतरो क परति सकारातमक अभिवतति पायी गई। साखयिकी निषकरष क आधार पर सभी शनय परिकलपनाए सवीकत हई, अरथात विभिनन दषटिकोणो स छातराधयापको की अभिवतति म कोई सारथक अतर नही पाया गया।
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