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महदव क कवय म रहसयवद

International journal of applied research · 2017 · Vol. 3(5) · pp. 611–615

Abstract

समगरतः छायावादी साहितय म रहसयवाद का जो सवरप विदयमान ह, वह आरय ससकति की उपज ह। छायावादी कवियो क रहसयवाद पर विभिनन विचारधाराओ का परभाव दिखायी दता ह। उनहोन वदिक साहितय स अदवत की छाया गरहण की और लौकिक परम का समनवय करक उस बोधगमय बना दिया। उनकी रहसयवादी भावना गढ़ न होकर सरल तथा मकतिदातरी ह। उनहोन परतीयमान जगत की अवासतविकता का बोध कराकर मानव जीवन को ईशवरोनमख तथा चरितर परधान बनाया।वसततः छायावाद क समबनध म जो विभिनन धारणाय आरमभ स परचलित हई व अतयनत उतावली म बना ली गयी थी। इसी कारण कही स एकागी ह और कही पर अतयकतिपरण। सच तो यह ह कि छायावादी कविताओ म एक साथ तीन-तीन करानतिया हई, जिसस यह कावयधारा पहल बनकर आयी। पहली करानति विचार और भावना क कषतर म हई, दसरी कला क कषतर म और तीसरी साहितय परमपरा म। यह परिवरतन इतनी तजी स हआ कि लोग उस समझ नही पाय। अनधो क दश म आधी क जस विविध परिभाषाए होती ह। उसी परकार परारमभ म हिनदी आलोचना कषतर म छायावादी कविता का सवागत हआ। आज बहत समय बीत जान पर लोगो क समयक रप स छायावादी कविता और उसक महतव को समझा तथा सवीकार किया ह।

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