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एक दलत यवक क आतमपड़न क अभवयकत ‘‘अककरमश‘‘ क सदरभ म
International journal of applied research · 2016 · Vol. 2(7) · pp. 650–652
Abstract
दलित साहितय की शरआत सरवपरथम मराठी साहितय म हई। दरअसल मराठी दलित साहितय बराहमणवादी, वरणवादी वयवसथा क विरदध एक पहल ह। बाबा साहब अबडकर न अछतो क सममान क लिय आवाज उठाई और ततकालीन वयवसथा का विरोध किया। अमबडकरवादी विचारधारा स परभावित होकर ही दलित साहितयकारो न अछतो की तड़प और बबसी को शबद दिय। अनभव और अभिवयकति की दषटि स उनका साहितय पारपरिक मराठी साहितय स सरवथा अलग ह। यह सकड़ो अछत जातियो क लिय आकरोशजनित सघरष ह। मराठी दलित साहितय न अपन पर आवग क साथ इस आकरोश की चिगारी को हवा दी। शरण कमार लिबाल की आतमकथा ’’अककरमाशी’’ इस दिशा म महतवपरण भमिका निभा रही ह।
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